• परमेश्‍वर के साथ संस्‍थापित विधान के लिए इस्राएली प्रजा का स्‍तुतिगान

  • |स्तोत्र 68:1| मुख्‍यवादक के लिए। दाऊद का। एक भजन। गीत। परमेश्‍वर उठता है; उसके शत्रु बिखर जाएँगे; जो उससे बैर करते हैं, वे उसके सम्‍मुख से भाग जाएंगे। a 

  • |स्तोत्र 68:2| जैसे धुआं उड़ाया जाता है, वैसे ही तू उन्‍हें उड़ा दे; जैसे मोम आग के सामने पिघलती है, वैसे ही दुर्जन परमेश्‍वर के समक्ष नष्‍ट हो जाएंगे।

  • |स्तोत्र 68:3| किन्‍तु धार्मिक हर्षित होंगे, वे परमेश्‍वर के समक्ष प्रफुल्‍लित होंगे, वे आनन्‍द में फूले न समाएँगे।

  • |स्तोत्र 68:4| परमेश्‍वर के लिये गीत गाओ, उसके नाम की स्‍तुति गाओ। उसका गुणगान करो, वह मेघों पर सवार है। [1] उसका नाम प्रभु है, उसके सम्‍मुख उल्‍लसित हो। b 

  • |स्तोत्र 68:5| परमेश्‍वर अपने पवित्र निवास स्‍थान में है; वह अनाथ बच्‍चे का पिता, और विधवाओं का रक्षक है।

  • |स्तोत्र 68:6| परमेश्‍वर बेघर को घर में बसाता है, वह बन्‍दियों को मुक्‍त कर उन्‍हें प्रसन्न करता है, किन्‍तु उससे विद्रोह करने वाले उजाड़ भूमि पर बसते हैं।

  • |स्तोत्र 68:7| हे परमेश्‍वर, जब तू अपनी प्रजा के आगे गया था, जब तू निर्जन प्रदेश पार करता था, सेलाह

  • |स्तोत्र 68:8| तब परमेश्‍वर, तेरी उपस्‍थिति से भूमि कांपने लगी और आकाश बरसने लगा था। यह सीनय पर्वत भी, परमेश्‍वर, इस्राएल के परमेश्‍वर की उपस्‍थिति से थर्राने लगा था। c 

  • |स्तोत्र 68:9| परमेश्‍वर, तूने मूसलाधार वर्षा की थी। जब तेरी मीरास [2] निराश हुई थी, तब तूने ही उसे विश्‍वास में स्‍थिर किया था।

  • |स्तोत्र 68:10| तेरा रेवड़ देश में बस गया; हे परमेश्‍वर, तूने अपनी भलाई के कारण, पीड़ित प्रजा की व्‍यवस्‍था की।


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