• उद्धार के लिए स्‍तुति

  • |स्तोत्र 118:1| प्रभु की सराहना करो; क्‍योंकि वह भला है, उसकी करुणा सदा बनी रहती है।

  • |स्तोत्र 118:2| इस्राएली जनता यह कहे, ‘प्रभु की करुणा सदा बनी रहती है।’

  • |स्तोत्र 118:3| हारून वंश के पुरोहित यह कहें, ‘प्रभु की करुणा सदा बनी रहती है।’

  • |स्तोत्र 118:4| प्रभु की भक्‍ति करने वाले यह कहें, ‘प्रभु की करुणा सदा बनी रहती है।’

  • |स्तोत्र 118:5| संकट में मैंने प्रभु को पुकारा; प्रभु ने मुझे उत्तर दिया, और मुझे संकट से मुक्‍त किया।

  • |स्तोत्र 118:6| प्रभु मेरे पक्ष में है, मैं नहीं डरूंगा। मनुष्‍य मेरा क्‍या कर सकता है? a 

  • |स्तोत्र 118:7| प्रभु मेरे पक्ष में है, वह मेरा सहायक है; मैं अपने बैरियों पर विजयपूर्ण दृष्‍टि करूंगा।

  • |स्तोत्र 118:8| मनुष्‍य पर भरोसा करने की अपेक्षा प्रभु की शरण लेना भला है।

  • |स्तोत्र 118:9| शासकों पर भरोसा करने की अपेक्षा प्रभु की शरण लेना भला है।

  • |स्तोत्र 118:10| सब राष्‍ट्रों ने मुझे घेर लिया; पर प्रभु के नाम से मैं उनका नाश करता हूं।


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