• परमेश्‍वर की महिमा; मानव का सम्‍मान

  • |स्तोत्र 8:1| मुख्‍यावादक के लिए। गित्तीत के अनुसार। दाऊद का भजन। हे प्रभु, हमारे स्‍वामी! तेरा नाम समस्‍त पृथ्‍वी पर कितना महान है! तेरी महिमा का स्‍तुतिगान [1] स्‍वर्ग पर होता है,

  • |स्तोत्र 8:2| शिशुओं और बच्‍चों के मुख से तेरी स्‍तुति होती है। अपने बैरियों के कारण, अपने शत्रु और प्रतिशोधी का अंत करने के लिए तूने एक गढ़ बनाया है। a 

  • |स्तोत्र 8:3| जब मैं देखता हूं तेरे आकाश को, जो तेरा हस्‍त-शिल्‍प है, चंद्रमा एवं नक्षत्रों को जिन्‍हें तूने स्‍थापित किया है,

  • |स्तोत्र 8:4| तब मनुष्‍य क्‍या है कि तू उसका स्‍मरण रखे? मानव-पुत्र क्‍या है कि तू उसकी सुधि ले? b 

  • |स्तोत्र 8:5| तो भी तूने उसे ईश्‍वर से कुछ घटकर बनाया, और उसे महिमा और सम्‍मान का मुकुट पहनाया। c 

  • |स्तोत्र 8:6| तूने उसे अपने हस्‍त-शिल्‍प पर अधिकार दिया; तूने सब कुछ उसके पांवों-तले कर दिया।

  • |स्तोत्र 8:7| भेड़-बकरी, गाय-बैल, और वन-पशु भी,

  • |स्तोत्र 8:8| आकाश के पक्षी, सागर की मछलियां, और वह सब कुछ जो समुद्र के मार्गों में विचरण करता है।

  • |स्तोत्र 8:9| हे प्रभु, हमारे स्‍वामी, तेरा नाम समस्‍त पृथ्‍वी पर कितना महान है!


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