• दुर्जन का अहंकार निस्‍सार है

  • |स्तोत्र 52:1|  a  मुख्‍यवादक के लिए। दाऊद का मसकील। जब एदोम देश के दोएग ने शाऊल पर यह प्रकट किया और कहा “दाऊद अहीमेलेक के घर में आया है।” अरे अत्‍याचारी [1], क्‍यों तू अपने कुकर्मों पर अहंकार करता है? परमेश्‍वर की करुणा सदा बनी रहती है। b 

  • |स्तोत्र 52:2| सान चढ़ी छुरी के समान, छल-कपट में निरन्‍तर कार्यरत तेरी जीभ विनाश के षड्‍यन्‍त्र रचती है।

  • |स्तोत्र 52:3| तुझे भलाई से अधिक बुराई, सच बोलने की अपेक्षा झूठ प्रिय है। c  सेलाह

  • |स्तोत्र 52:4| अरी कपटी जीभ! तू सब विनाशकारी बातों को प्‍यार करती है।

  • |स्तोत्र 52:5| अरे अत्‍याचारी, परमेश्‍वर तुझे सदा के लिए धूल में मिला देगा, वह तुझे पकड़ कर तेरे निवास-स्‍थान से निकाल देगा; वह तुझे जीव-लोक से उखाड़ देगा। सेलाह

  • |स्तोत्र 52:6| धार्मिक यह देखकर भयभीत होंगे, वे उसका उपहास करेंगे। वे यह कहेंगे:

  • |स्तोत्र 52:7| “देखो, उस शक्‍तिमान को, जिसने परमेश्‍वर को अपना गढ़ नहीं बनाया, वरन् जिसने अपने धन-वैभव की प्रचुरता पर भरोसा किया, और अपनी धन-सम्‍पत्ति को अपना गढ़ माना।”

  • |स्तोत्र 52:8| पर मैं परमेश्‍वर के घर मे हरे-भरे जैतून वृक्ष के सदृश हूँ; मैं परमेश्‍वर की करुणा पर सदा भरोसा करता हूँ। d 

  • |स्तोत्र 52:9| हे परमेश्‍वर, मैं सदा-सर्वदा तेरी स्‍तुति करता रहूंगा; क्‍योंकि तूने यह कार्य किया है। मैं तेरे नाम का यशोगान तेरे भक्‍तों के सम्‍मुख करूंगा; क्‍योंकि तेरा नाम उत्तम है।


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