• प्रभु राजा को राज्‍य प्रदान करता है

  • |स्तोत्र 110:1| दाऊद का। एक भजन। प्रभु ने मेरे स्‍वामी से कहा: ‘जब तक मैं तेरे शत्रुओं को तेरे चरणों की चौकी न बना दूं, तू मेरी दाहिनी ओर बैठ।’ a 

  • |स्तोत्र 110:2| प्रभु सियोन से आपको शक्‍तिशाली राजदण्‍ड प्रदान करता है, कि आप अपने शत्रुओं के मध्‍य शासन करें।

  • |स्तोत्र 110:3| जब आप युद्ध में विजय प्राप्‍त करते हैं, तब आपकी प्रजा स्‍वेच्‍छा से स्‍वयं को अर्पित करती है। आप पवित्रता से सुशोभित हैं। [1] उषा कल के गर्भ से ओस की बूंद के सदृश तरुणाई आपको प्राप्‍त होती है। [2]

  • |स्तोत्र 110:4| प्रभु ने शपथ खाई है, और वह अपना यह निश्‍चय नहीं बदलेगा: ‘तू मलकीसेदेक के समान सदा के लिए पुरोहित है।’  b 

  • |स्तोत्र 110:5| प्रभु आपकी दाहिनी ओर है, वह अपने कोप के दिन राजाओं को कुचल देगा। c 

  • |स्तोत्र 110:6| वह राष्‍ट्रों का न्‍याय-निर्णय करेगा, और लाशों को पाट देगा। वह धरती के विशाल क्षेत्र में शासकों को कुचल देगा।

  • |स्तोत्र 110:7| महाराज, आप मार्ग में झरने से जल पिएंगे, आप विजय से अपना सिर ऊंचा करेंगे।


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