• परमेश्‍वर समस्‍त पृथ्‍वी का सम्राट है

  • |स्तोत्र 47:1| मुख्‍यवादक के लिए। कोरह वंशियों का। एक भजन। हे सब जातियों, आनन्‍द से ताली बजाओ! ऊंचे स्‍वर में परमेश्‍वर का जयजयकार करो!

  • |स्तोत्र 47:2| क्‍योंकि प्रभु, सर्वोच्‍च परमेश्‍वर भय योग्‍य है; वह समस्‍त पृथ्‍वी का महान राजा है।

  • |स्तोत्र 47:3| उसने जातियों को हमारे अधीन और राष्‍ट्रों को हमारें चरणों-तले किया है।

  • |स्तोत्र 47:4| उसने हमारे लिए पैतृक भूमि को, “याकूब की शोभा” को चुना है; वह इस्राएल [1] से प्रेम करता है। सेलाह

  • |स्तोत्र 47:5| भक्‍तों के जयजयकार के समय, तुरही की ध्‍वनि के समय प्रभु परमेश्‍वर ऊपर गया! a 

  • |स्तोत्र 47:6| परमेश्‍वर की स्‍तुति गाओ, स्‍तुति गाओ! हमारे राजा की स्‍तुति गाओ, स्‍तुति गाओ!

  • |स्तोत्र 47:7| परमेश्‍वर समस्‍त पृथ्‍वी का राजा है; विशेष गीतों के साथ स्‍तुति गाओ!

  • |स्तोत्र 47:8| परमेश्‍वर समस्‍त राज्‍यों पर राज्‍य करता है; परमेश्‍वर अपने पवित्र सिंहासन पर विराजता है।

  • |स्तोत्र 47:9| अब्राहम के परमेश्‍वर की प्रजा बनने के लिए जाति-जाति के सामन्‍त एकत्र हुए हैं। क्‍योंकि पृथ्‍वी की ढालें परमेश्‍वर की हैं; वह अत्‍यन्‍त उन्नत हुआ है। b 


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