• मंदिर में मंजूषा का प्रतिष्‍ठापन

  • |स्तोत्र 132:1| यात्रा-गीत। हे प्रभु, दाऊद के हित में उसकी समस्‍त कठिनाइयों को स्‍मरण कर;

  • |स्तोत्र 132:2| प्रभु, उसने तेरी शपथ खाई है, उसने याकूब के सर्वशक्‍तिमान प्रभु की यह मन्नत मानी है:

  • |स्तोत्र 132:3| ‘मैं अपने घर में प्रवेश नहीं करूंगा, और न बिछे हुए बिस्‍तर पर लेटूंगा;

  • |स्तोत्र 132:4| मैं अपनी आंखों में नींद नहीं आने दूंगा, और न अपनी पलकों को झपकियां लेने दूंगा,

  • |स्तोत्र 132:5| जब तक मैं प्रभु के लिए एक स्‍थान, याकूब के सर्वशक्‍तिमान प्रभु के लिए एक निवास-स्‍थान प्राप्‍त न कर लूं।’

  • |स्तोत्र 132:6| देखो, हमने मंजूषा के विषय में एप्राताह [1] नगर में सुना; और हमने उसको यअर के मैदान में पाया।

  • |स्तोत्र 132:7| आओ, हम प्रभु के निवास-स्‍थान में प्रवेश करें, आओ, हम उसकी चरणों की चौकी के सम्‍मुख वन्‍दना करें।

  • |स्तोत्र 132:8| हे प्रभु, उठ! तू और तेरे सामथ्‍र्य की मंजूषा अपने विश्राम-स्‍थान को जाएं। a  b 

  • |स्तोत्र 132:9| तेरे पुरोहित धार्मिकता से विभूषित हों, तेरे भक्‍त जय-जयकार करें।

  • |स्तोत्र 132:10| अपने सेवक दाऊद के लिए हमारी प्रार्थना सुन; तू अपने अभिषिक्‍त राजा को अस्‍वीकार मत कर।


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