• |स्तोत्र 68:11| स्‍वामी आज्ञा देता है; शुभ संदेश सुनानेवाली महिलाओं का महान दल यह घोषित करता है:

  • |स्तोत्र 68:12| “सेनाओं के राजा भाग रहे हैं, वे भाग रहे हैं। घर पर रहने वाली स्‍त्रियाँ लूट को बाँटती हैं,

  • |स्तोत्र 68:13| उन्‍हें चांदी के कबूतर के पंख, और सोने के पैर मिले। ओ पुरुषो, क्‍या तुम भेड़शालाओं में दुबक कर बैठे रहोगे?”  d 

  • |स्तोत्र 68:14| जब सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वर ने राजाओं को वहां छिन्न-भिन्न कर दिया, तब ऐसा लगा मानो सलमोन पर्वत पर हिमपात हो रहा था।

  • |स्तोत्र 68:15| ओ विशाल पर्वत, बाशान पर्वत, ओ शिखरोंवाले पर्वत, बाशान पर्वत!

  • |स्तोत्र 68:16| ओ शिखरोंवाले पर्वत, ईष्‍र्या से उस पर्वत को क्‍यों देखते हो, जिस पर बसने की परमेश्‍वर ने इच्‍छा की है? निस्‍सन्‍देह प्रभु वहां युग-युगान्‍त निवास करेगा।

  • |स्तोत्र 68:17| परमेश्‍वर के रथ हजारों हैं, हजारों-हजार है; स्‍वामी सीनय पर्वत से पवित्र स्‍थान में आया। [3] e 

  • |स्तोत्र 68:18| वह [4] ऊंचे स्‍थान पर चढ़ गया; और बन्‍दियों को पकड़कर ले गया; उसने लोगों से, विद्रोहियों से भी, उपहार लिया। प्रभु परमेश्‍वर वहां निवास करेगा। f 

  • |स्तोत्र 68:19| धन्‍य है स्‍वामी! वह प्रति दिन हमारा भार वहन करता है; परमेश्‍वर ही हमारा उद्धार है। g  सेलाह

  • |स्तोत्र 68:20| हमारा परमेश्‍वर मुिक्‍त प्रदान करनेवाला परमेश्‍वर है; प्रभु-स्‍वामी के पास ही मृत्‍यु से मुिक्‍त है।


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