• |स्तोत्र 77:11| मैं प्रभु के कार्यों का स्‍मरण करूंगा; निस्‍सन्‍देह मैं अतीत के तेरे अद्भुत कार्य स्‍मरण करूंगा।

  • |स्तोत्र 77:12| मैं तेरे समस्‍त कार्यों पर मनन करूंगा; मैं तेरे अद्भुत कार्यों का ध्‍यान करूंगा।

  • |स्तोत्र 77:13| हे परमेश्‍वर, तेरा मार्ग पवित्र है; परमेश्‍वर के सदृश और कौन ईश्‍वर महान् है?

  • |स्तोत्र 77:14| अद्भुत कार्य करने वाला परमेश्‍वर तू ही है; तूने ही अपना सामथ्‍र्य जातियों पर प्रकट किया है।

  • |स्तोत्र 77:15| तूने अपने भुजबल से अपनी प्रजा को, याकूब और यूसुफ की सन्‍तान को मुक्‍त किया। सेलाह

  • |स्तोत्र 77:16| हे परमेश्‍वर, जब सागर ने तुझे देखा, हां, जब सागर ने तुझे देखा, तब वह डर गया; अथाह सागर कांप उठा।

  • |स्तोत्र 77:17| मेघ जल-वृष्‍टि करने लगे, आकाश गरज उठे, तेरे बाण सर्वत्र चलने लगे।

  • |स्तोत्र 77:18| तेरे गर्जन का शब्‍द बवण्‍डर में सुनाई पड़ा; विद्युत से भूमण्‍डल आलोकित हो उठा; पृथ्‍वी कंपित होकर डोल उठी।

  • |स्तोत्र 77:19| तेरा मार्ग सागर से, तेरा पथ महासागर से जाता था; पर तेरे पद-चिह्‍नों का पता नहीं चला!

  • |स्तोत्र 77:20| तूने रेवड़ के सदृश अपनी प्रजा का मूसा और हारून के द्वारा नेतृत्‍व किया था। d 


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