• |स्तोत्र 44:21| तो क्‍या परमेश्‍वर ने इसका पता नहीं लगा लिया होता? वह हृदय के भेदों को जानता है।

  • |स्तोत्र 44:22| पर नहीं! हम तो तेरे कारण निरन्‍तर मौत के घाट उतारे जाते हैं; हमें वध होनेवाली भेड़ जैसा समझा गया। e 

  • |स्तोत्र 44:23| जाग स्‍वामी! तू क्‍यों सो रहा है? उठ! सदा के लिए हमें न त्‍याग।

  • |स्तोत्र 44:24| तू अपना मुख क्‍यों छिपा रहा है? क्‍या तूने हमारी पीड़ा और कष्‍ट को भुला दिया है?

  • |स्तोत्र 44:25| हमारे प्राण धूल में मिल गए हैं, और पेट भूमि से चिपक गया है।

  • |स्तोत्र 44:26| उठ, और हमारी सहायता कर; अपनी करुणा के कारण हमारा उद्धार कर।


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