• |स्तोत्र 147:11| पर वह अपने भक्‍तों से, उसकी करुणा की प्रतीक्षा करनेवालों से प्रसन्न होता है।

  • |स्तोत्र 147:12| ओ यरूशलेम, प्रभु की प्रशंसा कर, ओ सियोन, अपने परमेश्‍वर की स्‍तुति कर।

  • |स्तोत्र 147:13| प्रभु तेरे द्वार की अर्गलाओं को सुदृढ़ करता, वह तुझमें रहनेवाले तेरे पुत्र-पुत्रियों को आशिष देता है।

  • |स्तोत्र 147:14| वह तेरी सीमाओं पर शान्‍ति रखता, वह तुझे प्रचुर मात्रा में उत्तम गेहूं से तृप्‍त करता है।

  • |स्तोत्र 147:15| वह पृथ्‍वी पर अपने शब्‍द भेजता है; उसके वचन तेज गति से दौड़ते हैं।

  • |स्तोत्र 147:16| वह ऊन के सदृश बर्फ की वर्षा करता है। वह राख के समान पाला बिखेरता है।

  • |स्तोत्र 147:17| वह बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े भेजता है; उसकी ठण्‍ड से जल जम जाता है। c 

  • |स्तोत्र 147:18| वह अपना वचन भेजकर उसे पिघलाता है; वह अपना पवन बहाता और जल बहने लगता है।

  • |स्तोत्र 147:19| वह याकूब को अपना वचन, इस्राएल को अपनी संविधि और न्‍याय- सिद्धान्‍त बताता है। d 

  • |स्तोत्र 147:20| प्रभु ने यह व्‍यवहार अन्‍य राष्‍ट्रों से नहीं किया, वे प्रभु के न्‍याय-सिद्धान्‍तों को नहीं जानते हैं। प्रभु की स्‍तुति करो! e 


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