• |यिर्मयाह 31:31| प्रभु यों कहता है : ‘देखो, समय आ रहा है, जब मैं इस्राएल और यहूदा प्रदेशों की जनता के साथ नया विधान स्‍थापित करूंगा। h 

  • |यिर्मयाह 31:32| यह विधान उस विधान के समान नहीं होगा, जो मैंने उनके पूर्वजों से स्‍थापित किया था। जब मैं उनका हाथ पकड़ कर उन्‍हें मिस्र देश से निकाल लाया था, तब मैंने उनसे विधान स्‍थापित किया था। किन्‍तु उन्‍होंने मेरे विधान को तोड़ डाला था, यद्यपि मैं उन का स्‍वामी था। मुझ-प्रभु की यह वाणी है।’

  • |यिर्मयाह 31:33| प्रभु यों कहता है : ‘उन दिनों के पश्‍चात् मैं इस्राएली जनता से यह विधान स्‍थापित करूंगा: मैं उनके मन में अपनी व्‍यवस्‍था प्रतिष्‍ठित करूंगा, और मैं उसको उनके हृदय पर लिखूंगा। मैं उनका परमेश्‍वर होऊंगा, और वे मेरे निज लोग होंगे। i 

  • |यिर्मयाह 31:34| तब किसी भी व्यक्‍ति को अपने पड़ोसी अथवा भाई-बन्‍धु को यह सिखाने की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी कि “प्रभु को जानो,” क्‍योंकि छोटे-बड़े सब लोग स्‍वयं मुझे जानेंगे। मैं उनके अधर्म को क्षमा कर दूंगा, और उनका पाप फिर स्‍मरण नहीं करूंगा। मुझ-प्रभु की यह वाणी है।’

  • |यिर्मयाह 31:35| प्रभु, जिसने दिन में प्रकाश देने के लिए सूर्य को नियुक्‍त किया है, जिस ने रात में रोशनी के लिए चन्‍द्रमा और तारों को स्‍थित किया है; जो समुद्र को उत्तेजित करता है और लहरें गरजने लगती हैं; और जिसका यह नाम है, “स्‍वर्गिक सेनाओं का प्रभु,” वह यों कहता है,  j 

  • |यिर्मयाह 31:36| ‘क्‍या यह संभव है कि सूर्य, चन्‍द्रमा और तारों के ये निश्‍चित नियम मेरे सम्‍मुख से टल जाएं? यदि यह संभव है तो इस्राएल के वंशज भी मेरे सामने से एक राष्‍ट्र के रूप में सदा के लिए विलुप्‍त हो जाएंगे।’

  • |यिर्मयाह 31:37| प्रभु यों कहता है, ‘ऊपर आकाश को यदि नापना संभव है, अथवा यदि नीचे, पृथ्‍वी की नींव का पता लगाया जा सकता है, तो मैं इस्राएल के सब वंशजों को उन के समस्‍त दुष्‍कर्मों के कारण त्‍याग दूंगा। मुझ-प्रभु की यह वाणी है।’

  • |यिर्मयाह 31:38| प्रभु कहता है, ‘देखो, समय आ रहा है, जब यह नगर हननएल बुर्ज से कोना-द्वार तक मेरे लिए पुनर्निर्मित होगा।

  • |यिर्मयाह 31:39| उस के माप की डोरी सीधे आगे जाएगी, वह गारेब पहाड़ी पर पहुंचेगी, और वहां से घूम कर गोआ तक जाएगी।

  • |यिर्मयाह 31:40| सम्‍पूर्ण घाटी, जहां लाशें और राख के ढेर पड़े हैं, तथा किद्रोन नाले तक के सब खेत और पूर्व के अश्‍व-द्वार के कोने तक की समस्‍त भूमि मुझ-प्रभु के लिए पवित्र मानी जाएगी। ‘यह नगर फिर कभी ध्‍वस्‍त नहीं होगा, और न यह ढाया ही जाएगा।’  k 


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