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|यिर्मयाह 30:11|मैं-प्रभु कहता हूं : मैं तुझे बचाने के लिए तेरे साथ हूँ। जिन राष्ट्रों में मैंने तुझ को बिखेर दिया था, उन-सब का मैं पूर्ण संहार कर दूंगा। मैं तेरा पूर्ण विनाश नहीं करूंगा, किन्तु तुझे उचित मात्रा में दण्ड दूंगा; निस्सन्देह मैं तुझको दण्ड दिए बिना नहीं छोड़ूंगा।
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|यिर्मयाह 30:12|‘प्रभु यों कहता है; ओ इस्राएली कौम, तेरी चोट असाध्य है, तेरा घाव गहरा है।
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|यिर्मयाह 30:13|तुझे न्याय दिलानेवाला कोई नहीं है। तेरे घाव की कोई दवा नहीं है; तेरा रोग स्वस्थ नहीं होगा।
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|यिर्मयाह 30:14|तेरे सभी प्रेमी तुझे भूल गए हैं; अब वे तेरी कामना नहीं करते। मैंने तुझे शत्रु जैसा मारा है, निर्दय शत्रु के समान तुझे कठोर दण्ड दिया है; क्योंकि तूने बड़े-बड़े दुष्कर्म किये हैं, तेरे पाप गंभीर हैं। c
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|यिर्मयाह 30:15|तू अपनी चोट के लिए क्यों चिल्लाती है? तेरे दर्द का कोई इलाज नहीं है। क्योंकि तूने बड़े-बड़े दुष्कर्म किए हैं, तेरे पाप गंभीर हैं। इसीलिए मैंने तेरे साथ यह व्यवहार किया है।
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|यिर्मयाह 30:16|सुन, जो तुझ को खाते हैं, उनको भी दूसरे खा लेंगे। तेरा प्रत्येक बैरी, तेरे सब शत्रु बन्दी बनकर अपने देश से निष्कासित होंगे। तुझको लूटनेवाला स्वयं लूटा जाएगा; जो तुझको हड़पेगा, उसको दूसरे हड़प लेंगे।
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|यिर्मयाह 30:17|मैं-प्रभु कहता हूँ : मैं तेरा स्वास्थ्य तुझे लौटाऊंगा, मैं तेरे घाव भर दूंगा। क्योंकि तेरे शत्रुओं ने तुझे ‘परित्यक्ता’ कहा है : “देखो, यह है सियोन नगरी, जिसकी अब कोई चिन्ता नहीं करता।”
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|यिर्मयाह 30:18|‘प्रभु यों कहता है : देखो, मैं याकूब के ध्वस्त मकानों का वैभव लौटाऊंगा : उसके निवास-स्थानों पर दया करूंगा। नगर का पुनर्निर्माण उसके मलबों के ढेर पर होगा। राजमहल वहां फिर खड़ा होगा, जहां वह पहले था।
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|यिर्मयाह 30:19|तब नगर में मेरी स्तुति के गान सुनाई देंगे; आनन्द मनानेवालों का शोर वहां सुनाई देगा। मैं उनकी आबादी बढ़ाऊंगा, और तब वे जनसंख्या में थोड़े न होंगे। मैं उनका गौरव दिन दूना - रात चौगुना बढ़ाऊंगा, और वे फिर तुच्छ न समझे जाएंगे।
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|यिर्मयाह 30:20|जैसे प्राचीन काल में उनके बच्चे थे, वैसे ही अब होंगे, और उनकी धर्म-मण्डली मेरे सम्मुख सुदृढ़ हो जाएगी। जो उन पर अत्याचार करेगा, उनको मैं दण्ड दूंगा।
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