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|यिर्मयाह 14:11| प्रभु ने मुझसे कहा, ‘यिर्मयाह, तू इन लोगों के कल्याण के लिए प्रार्थना मत कर।
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|यिर्मयाह 14:12| यद्यपि ये उपवास करते हैं, तो भी मैं इनकी दुहाई नहीं सुनूंगा। यद्यपि ये मुझे अग्नि-बलि और अन्न-बलि चढ़ाते हैं, तो भी मैं इन लोगों को स्वीकार नहीं करूंगा। मैं इन लोगों को तलवार से मौत के घाट उतार दूंगा, इनको अकाल और महामारी से मिटा दूंगा।’ b
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|यिर्मयाह 14:13| मैंने कहा, ‘परन्तु स्वामी, प्रभु! देख, नबी तो उनसे यह कहते हैं: “ओ यहूदा प्रदेश के निवासियो, ओ यरूशलेम के नागरिको, न तुम शत्रु की तलवार देखोगे, और न तुम पर अकाल और महामारी की छाया पड़ेगी। प्रभु तुम को इस देश में सुख-चैन की नींद सोने देगा।” ’
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|यिर्मयाह 14:14| तब प्रभु ने मुझ से कहा, ‘ये नबी मेरे नाम से झूठी नबूवत कर रहे हैं। मैंने इन झूठे नबियों को नहीं भेजा है। न तो मैंने इन्हें कोई आदेश दिया है, और न इनसे मैं बोला हूं। ये तुम से झूठे दर्शन की भविष्यवाणी कर रहे हैं। ये मन-गढ़न्त बातों की नबूवत करते हैं। ये निस्सार शकुन की बातें विचारते हैं।
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|यिर्मयाह 14:15| अत: मैं, प्रभु, इन नबियों के सम्बन्ध में यह कहता हूं : जो नबी मेरे नाम से नबूवतें करते हैं, यद्यपि मैंने उनको नहीं भेजा है, और जो जनता से यह कहते हैं, “इस देश पर तलवार और अकाल की छाया नहीं पड़ेगी,” वे तलवार और अकाल से ही नष्ट होंगे।
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|यिर्मयाह 14:16| और जिन लोगों को ये नबूवतें सुनाते हैं, वे अकाल और तलवार के शिकार बन जाएंगे, और उनकी लाशें यरूशलेम की सड़कों पर लावारिस पड़ी रहेंगी, क्योंकि उन को गाड़नेवाला कोई न होगा। उनकी, तथा पत्नी, पुत्रों और पुत्रियों की यही दुर्दशा होगी। मैं उनके दुष्कर्म ही उनके सिर पर उण्डेल दूंगा।
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नबी यिर्मयाह का विलाप
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|यिर्मयाह 14:17|‘ओ यिर्मयाह, तू उन से यह कहना: “मेरी आंखों से दिन-रात आंसुओं की झड़ी लगी रहती है; मेरे आंसू नहीं रुकते; क्योंकि यहूदा प्रदेश की जनता [1] का सर्वनाश हो गया है; उसका भयंकर विनाश हुआ है।
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|यिर्मयाह 14:18|अगर मैं मैदान में जाता हूं तो मुझे वहां तलवार की मारकाट दिखाई देती है। यदि नगर में प्रवेश करता हूं तो मुझे वहां अकाल की महामारी दिखाई देती है। नबी और पुरोहित देश में रोजगार की तलाश में मारे-मारे फिर रहे हैं। [2] वे समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या करें।” ’
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|यिर्मयाह 14:19|हे प्रभु, क्या तूने यहूदा को पूर्णत: त्याग दिया है? क्या तू सियोन से घृणा करने लगा है? तूने हमें इस तरह क्यों मारा कि हम अब स्वस्थ हो ही नहीं सकते? हम कल्याण की बाट जोहते रहे, पर हमारा कल्याण नहीं हुआ, हम स्वस्थ होने की प्रतीक्षा करते हैं, पर देख, हम पर आतंक छा गया।
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|यिर्मयाह 14:20|हे प्रभु, हम अपने और अपने पूर्वजों के दुष्कर्मों को उनके अधर्म के कामों को स्वीकार करते हैं। हे प्रभु, हमने तेरे प्रति पाप किया है।
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