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|व्यवस्था विवरण 32:21|जो ईश्वर नहीं है, उसके प्रति निष्ठा प्रदर्शित कर उन्होंने मुझमें ईष्र्या उत्पन्न की। उन्होंने अपने देवताओं की मूर्तियों से मुझे चिढ़ाया। मैं ऐसे लोगों द्वारा उनमें जलन उत्पन्न करूंगा, जो चुने हुए लोग नहीं हैं! मैं मूर्ख राष्ट्र के द्वारा उन्हें चिढ़ाऊंगा। l
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|व्यवस्था विवरण 32:22|मेरे क्रोध के कारण अग्नि जल उठी है। वह अधोलोक के नीचे तक जलेगी। वह पृथ्वी और उसकी उपज को भस्म कर देगी, पर्वतों की नींव में आग लगा देगी।
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|व्यवस्था विवरण 32:23| ‘मैं उन पर विपत्तियों का ढेर लगा दूंगा,मैं उन पर अपने तरकश के तीर खाली कर दूंगा।
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|व्यवस्था विवरण 32:24|अकाल उन्हें तबाह कर देगा, घोर ताप से वे भस्म हो जाएंगे; असाध्य महामारियां उन्हें घेर लेंगी, मैं उनके विरुद्ध हिंसक पशु, भूमि पर रेंगनेवाले विषैले जन्तु भेजूंगा।
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|व्यवस्था विवरण 32:25|वे युद्ध-भूमि में तलवार से निर्वंश हो जाएंगे, वे घर के भीतर भय से आक्रांत होंगे। युवक और युवतियाँ, दुधमुंहा बच्चा और वृद्ध, सब नष्ट हो जाएंगे। m
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|व्यवस्था विवरण 32:26|मैंने कहा था, मैं इन्हें दूर देशों में तितर-बितर कर दूंगा। मैं मनुष्यों के मध्य से इनका स्मृति-चिह्न मिटा डालूंगा।
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|व्यवस्था विवरण 32:27|पर मुझे शत्रुओं की चिढ़ का भय था; ऐसा न हो कि उनके बैरियों को भ्रम हो, और वे यह कहें, “हमने अपने भुजबल से विजय प्राप्त की है। प्रभु ने यह सब नहीं किया।”
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|व्यवस्था विवरण 32:28| ‘यह अदूरदर्शी राष्ट्र है।इन लोगों में समझ नहीं है।
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|व्यवस्था विवरण 32:29|यदि इनमें बुद्धि होती तो ये यह बात सोचते, अपने कार्यों के अन्त को समझते!
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|व्यवस्था विवरण 32:30|कैसे एक व्यक्ति हजार सैनिकों का पीछा कर सकता है, कैसे दो व्यक्ति दस हजार सैनिकों को भगा सकते हैं, यदि उनकी “चट्टान” उनको बेच न देती, यदि प्रभु उनसे आत्म-समर्पण न कराता?
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