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न्याय और नीति के सिद्धान्त
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|एक्सोदेस 23:1| ‘तू झूठी अफवाह नहीं फैलाना। विद्वेष-पूर्ण साक्षी देने के लिए दुर्जन से सहयोग मत करना। a
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|एक्सोदेस 23:2| तू बुरा कार्य करने के लिए भीड़ का अनुसरण नहीं करना। तू न्याय को विकृत करने के उद्देश्य से भीड़ का अनुसरण मत करना और मुकद्दमे में झूठी साक्षी नहीं देना।
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|एक्सोदेस 23:3| तू दरिद्र व्यक्ति के मुकद्दमे में उसका पक्षपात नहीं करना। b
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|एक्सोदेस 23:4| ‘जब तुझे तेरे शत्रु का बैल अथवा गधा भटकता हुआ मिले तब तू उस पशु को उसके पास लाना। c
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|एक्सोदेस 23:5| जब तू उस व्यक्ति के गधे को बोझ से दबा हुआ देखे, जो तुझसे घृणा करता है, तब उसे वैसा ही मत छोड़ना वरन् बोझ उठाने में उसकी सहायता करना [1]।
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|एक्सोदेस 23:6| ‘अपने दरिद्र अभियुक्त के मुकद्दमे में न्याय को विकृत नहीं करना। d
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|एक्सोदेस 23:7| तू झूठे आरोप से दूर रहना और निर्दोष तथा भक्त का वध न करना; क्योंकि मैं दुर्जन को निर्दोष नहीं घोषित करूँगा।
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|एक्सोदेस 23:8| तू घूस मत लेना; क्योंकि घूस दृष्टिवाले व्यक्तियों को भी दृष्टिहीन बनाती है। वह भक्तों के न्याय-पक्ष को उलट देती है।
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|एक्सोदेस 23:9| ‘तू प्रवासी व्यक्ति का दमन मत करना। तुम्हें प्रवासी के जीवन का अनुभव है; क्योंकि तुम स्वयं मिस्र देश में प्रवासी थे। e
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विश्राम दिवस
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|एक्सोदेस 23:10| ‘तू छ: वर्ष तक अपने खेत में बोआई करना और उसकी उपज एकत्र करना; f
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