-
पहाड़ी-उपदेश
-
|माथिउस 5:1| a येशु विशाल जनसमूह को देखकर पहाड़ी पर चढ़े और वहाँ बैठ गये। उनके शिष्य उनके पास आए b
-
-
-
|माथिउस 5:2| और वह यह कहते हुए उन्हें शिक्षा देने लगे :
-
-
-
धन्य-वचन
-
|माथिउस 5:3|“धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं; क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। c
-
-
-
|माथिउस 5:4|धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं; क्योंकि उन्हें सान्त्वना मिलेगी। d
-
-
-
|माथिउस 5:5|धन्य हैं वे जो नम्र हैं; क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। e
-
-
-
|माथिउस 5:6|धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं; क्योंकि वे तृप्त किये जाएँगे। f
-
-
-
|माथिउस 5:7|धन्य हैं वे, जो दयालु हैं; क्योंकि उन पर दया की जाएगी। g
-
-
-
|माथिउस 5:8|धन्य हैं वे, जिनका हृदय निर्मल है; क्योंकि वे परमेश्वर के दर्शन करेंगे। h
-
-
-
|माथिउस 5:9|धन्य हैं वे, जो मेल-मिलाप कराते हैं; क्योंकि वे परमेश्वर की संतान कहलाएँगे। i
-
-
-
|माथिउस 5:10|धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण अत्याचार सहते हैं; क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है। j
-
-
पुर्तगाली
इतालवी
स्पैनिश
अंग्रेज़ी
फ्रेंच
अरबी
अकर्मण्य
हिन्दी
जर्मन
