• योहन बपतिस्‍मादाता और उनका उपदेश

  • |माथिउस 3:1|  a उन दिनों योहन बपतिस्‍मादाता [1] यहूदा प्रदेश के निर्जन प्रदेश में आए, और वहाँ यह प्रचार करने लगे b  :

  • |माथिउस 3:2| “पश्‍चात्ताप करो, क्‍योंकि स्‍वर्ग का राज्‍य निकट आ गया है।” c 

  • |माथिउस 3:3| योहन वही व्यक्‍ति थे जिनके विषय में नबी यशायाह ने कहा था, “निर्जन प्रदेश में पुकारने वाले की आवाज : प्रभु का मार्ग तैयार करो; उसके पथ सीधे कर दो।” d 

  • |माथिउस 3:4| योहन ऊंट के रोओं का वस्‍त्र पहने और कमर में चमड़े का पट्टा बाँधे रहते थे। उनका भोजन टिड्डियाँ और वन का मधु था। e 

  • |माथिउस 3:5| यरूशलेम नगर, समस्‍त यहूदा प्रदेश और यर्दन नदी के आसपास के क्षेत्रों से लोग योहन के पास आते

  • |माथिउस 3:6| और अपने पाप स्‍वीकार करते हुए यर्दन नदी में उनसे बपतिस्‍मा ग्रहण करते थे।

  • |माथिउस 3:7| बहुत से फरीसियों और सदूकियों [2] को बपतिस्‍मा के लिए आते देख कर योहन ने उन से कहा, “साँप के बच्‍चो! किसने तुम लोगों को परमेश्‍वर के आने वाले कोप से भागने के लिए सचेत कर दिया? f 

  • |माथिउस 3:8| पश्‍चात्ताप का उचित फल उत्‍पन्न करो

  • |माथिउस 3:9| और अपने मन में यह न सोचो कि ‘हम अब्राहम की सन्‍तान हैं’। मैं तुम से कहता हूँ − परमेश्‍वर इन पत्‍थरों से अब्राहम के लिए सन्‍तान उत्‍पन्न कर सकता है। g 

  • |माथिउस 3:10| अब पेड़ों की जड़ पर कुल्‍हाड़ा लग चुका है। जो पेड़ अच्‍छा फल नहीं देता, वह काटा और आग में झोंक दिया जाएगा। h 


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