• |माथिउस 10:11| “जिस किसी नगर या गाँव में प्रवेश करो, तो पता लगाओ कि वहाँ कौन सुपात्र है और विदा होने तक उसी के यहाँ ठहरो।

  • |माथिउस 10:12| घर में प्रवेश करते समय उसे शान्‍ति की आशिष दो। g 

  • |माथिउस 10:13| यदि वह घर योग्‍य है, तो अपनी शान्‍ति उस पर रहने दो। यदि वह घर योग्‍य नहीं है, तो अपनी शान्‍ति अपने पास लौट आने दो।

  • |माथिउस 10:14| यदि कोई तुम्‍हारा स्‍वागत न करे और तुम्‍हारी बातें न सुने, तो उस घर या उस नगर से निकलने पर अपने पैरों की धूल झाड़ दो। h 

  • |माथिउस 10:15| मैं तुम से सच कहता हूँ − न्‍याय के दिन उस नगर की दशा की अपेक्षा सदोम और गमोरा नगरों की दशा कहीं अधिक सहनीय होगी। i 
  • भावी संकट

  • |माथिउस 10:16| “देखो, मैं तुम्‍हें भेड़ियों के बीच भेड़ों की तरह भेज रहा हूँ। इसलिए साँप की तरह चतुर और कपोत की तरह निष्‍कपट बनो। j 

  • |माथिउस 10:17| “मनुष्‍यों से सावधान रहो। k  वे तुम्‍हें धर्मसभाओं के हाथ में सौंप देंगे और अपने सभागृहों में तुम्‍हें कोड़े लगाएंगे। l 

  • |माथिउस 10:18| तुम मेरे कारण शासकों और राजाओं के सामने पेश किये जाओगे, जिससे मेरे विषय में तुम उन्‍हें और गैर-यहूदियों को साक्षी दे सको। m 

  • |माथिउस 10:19| “जब वे तुम्‍हें पकड़वाएँ तब यह चिन्‍ता नहीं करना कि तुम कैसे बोलोगे और क्‍या कहोगे; क्‍योंकि जो शब्‍द तुमको कहने होंगे वे उस समय तुम्‍हें दिये जाएँगे। n 

  • |माथिउस 10:20| क्‍योंकि बोलने वाले तुम नहीं हो, बल्‍कि तुम्‍हारे पिता का आत्‍मा है, जो तुम्‍हारे द्वारा बोलता है। o 


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