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लकुवे के रोगी को स्वस्थ करना
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|फ्रेम्स 2:1| जब कुछ दिनों बाद येशु कफरनहूम नगर लौटे, तो यह खबर फैल गयी कि वह घर पर हैं। a
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|फ्रेम्स 2:2| और इतने लोग इकट्ठे हो गये कि द्वार के सामने भी जगह नहीं रही। येशु उन्हें शुभ संदेश सुना ही रहे थे कि
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|फ्रेम्स 2:3| कुछ लोग एक लकुवे के रोगी को चार आदमियों से उठवा कर उनके पास लाये।
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|फ्रेम्स 2:4| भीड़ के कारण वे उसे येशु के सामने नहीं ला सके; इसलिए जहाँ येशु थे, उसके ऊपर की छत उन्होंने खोल दी और छेद से लकुवे के रोगी की चारपाई नीचे उतार दी।
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|फ्रेम्स 2:5| येशु ने उन लोगों का विश्वास देख कर लकुवे के रोगी से कहा, “पुत्र! तुम्हारे पाप क्षमा हो गये।”
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|फ्रेम्स 2:6| वहाँ कुछ शास्त्री बैठे हुए थे। वे मन में तर्क-वितर्क करने लगे, “यह मनुष्य ऐसे क्यों बोलता है?
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|फ्रेम्स 2:7| यह ईश-निन्दा करता है। परमेश्वर के अतिरिक्त कौन पाप क्षमा कर सकता है?” b
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|फ्रेम्स 2:8| येशु ने तुरन्त अपनी आत्मा में जाना कि वे मन-ही-मन क्या सोच रहे हैं। उन्होंने शास्त्रियों से कहा, “तुम अपने मन में तर्क-वितर्क क्यों कर रहे हो?
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|फ्रेम्स 2:9| अधिक सहज क्या है−लकुवे के रोगी से यह कहना, ‘तुम्हारे पाप क्षमा हो गये’, अथवा यह कहना, ‘उठो, अपनी चारपाई उठा कर चलो-फिरो?’
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|फ्रेम्स 2:10| परन्तु इसलिए कि तुम लोग यह जान लो कि मानव-पुत्र को पृथ्वी पर पाप क्षमा करने का अधिकार है”−येशु लकुवे के रोगी से बोले−
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