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योहन बपतिस्मादाता का उपदेश
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|फ्रेम्स 1:1| परमेश्वर के पुत्र येशु मसीह के शुभ समाचार का आरम्भ।
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|फ्रेम्स 1:2| नबी यशायाह के ग्रन्थ में लिखा है, “परमेश्वर कहता है a :देखो, मैं अपने दूत को तुम्हारे आगे भेज रहा हूँ। वह तुम्हारा मार्ग तैयार करेगा। b
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|फ्रेम्स 1:3|निर्जन प्रदेश में पुकारने वाले की आवाज : ‘प्रभु का मार्ग तैयार करो; उसके पथ सीधे कर दो।’ ” c
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|फ्रेम्स 1:4| इसी के अनुसार योहन बपतिस्मादाता निर्जन प्रदेश में प्रकट हुए। वह पापक्षमा के लिए पश्चात्ताप के बपतिस्मा का उपदेश देते थे।
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|फ्रेम्स 1:5| समस्त यहूदा प्रदेश और सब यरूशलेम-निवासी योहन के पास आते और अपने पाप स्वीकार करते हुए यर्दन नदी में उन से बपतिस्मा ग्रहण करते थे।
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|फ्रेम्स 1:6| योहन ऊंट के रोओं का वस्त्र पहने और कमर में चमड़े का पट्टा बाँधे रहते थे। उनका आहार टिड्डियाँ और वन का मधु था। d
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|फ्रेम्स 1:7| वह अपने उपदेश में कहते थे, “मुझ से अधिक शक्तिशाली व्यक्ति मेरे बाद आने वाले हैं। मैं तो झुक कर उनके जूते का फीता खोलने योग्य भी नहीं हूँ। e
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|फ्रेम्स 1:8| मैंने तुम लोगों को जल से बपतिस्मा दिया है, परन्तु वह तुम्हें पवित्र आत्मा से बपतिस्मा देंगे।”
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प्रभु येशु का बपतिस्मा
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|फ्रेम्स 1:9| उन दिनों येशु गलील प्रदेश के नासरत नगर से आए। f उन्होंने यर्दन नदी में योहन से बपतिस्मा ग्रहण किया। g
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|फ्रेम्स 1:10| वह पानी से निकल ही रहे थे कि उन्होंने स्वर्ग को खुलते [1] और आत्मा को अपने ऊपर कपोत के सदृश उतरते देखा
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