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|फ्रेम्स 14:51| एक युवक, अपने नंगे बदन पर मलमल की चादर ओढ़े येशु के पीछे हो लिया। किन्तु जब भीड़ ने उसे पकड़ा,
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|फ्रेम्स 14:52| तो वह चादर छोड़ कर नंगा ही भाग गया।
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धर्ममहासभा के सामने
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|फ्रेम्स 14:53| वे येशु को प्रधान महापुरोहित के यहाँ ले गये। सब महापुरोहित, धर्मवृद्ध और शास्त्री वहाँ एकत्र हुए थे।
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|फ्रेम्स 14:54| येशु से कुछ दूरी रखते हुए पतरस उनके पीछे-पीछे प्रधान महापुरोहित के भवन के आंगन तक गया था और वहाँ पहरेदारों के साथ बैठ कर आग ताप रहा था।
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|फ्रेम्स 14:55| महापुरोहित और सारी धर्ममहासभा येशु को मरवा डालने के उद्देश्य से उनके विरुद्ध गवाही खोज रही थी, परन्तु वह मिली नहीं। x
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|फ्रेम्स 14:56| बहुत-से लोगों ने तो उनके विरुद्ध झूठी गवाही दी, किन्तु उनके बयान मेल नहीं खाते थे।
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|फ्रेम्स 14:57| तब कुछ लोग उठे और उन्होंने येशु के विरुद्ध यह झूठी गवाही दी,
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|फ्रेम्स 14:58| “हमने इस व्यक्ति को ऐसा कहते सुना है : ‘मैं हाथ का बनाया हुआ यह मन्दिर ढा दूँगा और तीन दिन में दूसरा खड़ा कर दूँगा, जो हाथ का बनाया हुआ नहीं होगा।’ ” y
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|फ्रेम्स 14:59| किन्तु इसके विषय में भी उनके बयान मेल नहीं खाये थे।
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|फ्रेम्स 14:60| तब प्रधान महापुरोहित ने सभा के बीच में खड़े होकर येशु ने पूछा, “ये लोग तुम्हारे विरुद्ध जो गवाही दे रहे हैं, क्या इसका कोई उत्तर तुम्हारे पास नहीं है?”
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