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|डैनियल 4:11| वह पेड़ बढ़ता ही गया और मजबूत होता गया। वह इतना बढ़ा कि उसका शिखर आकाश को छूने लगा। वह इतना ऊंचा हो गया कि पृथ्वी के छोर से दिखाई देने लगा।
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|डैनियल 4:12| उसकी पत्तियां दिखने में सुन्दर थीं और वह फलों से लदा था। उसमें इतने फल थे कि सब प्राणी उनको खाकर तृप्त हो सकते थे। उसकी छांव में सब वन-पशु बसेरा कर रहे थे। उसकी शाखाओं पर आकाश के पक्षियों ने घोंसले बना लिए थे। पृथ्वी के प्राणी उसका फल खाकर अपना भरण-पोषण करते थे। a
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|डैनियल 4:13| ‘जब मैं पलंग पर लेटा हुआ अपने मन में यह दर्शन देख रहा था, तब मैंने दर्शन में एक प्रहरी [1] को देखा। वह पवित्र दूत था, जो स्वर्ग से नीचे उतरा।
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|डैनियल 4:14| उसने उच्च स्वर में पुकारा, और यह कहा, “इस वृक्ष को काट डालो, और इसकी शाखाओं को छांट दो। इसकी पत्तियों को झड़ा दो, और इसके फल बिखेर दो। इसकी छांव में बैठे हुए वनपशुओं को भगा दो। इसकी शाखाओं में बसेरा करनेवाले पक्षियों को उड़ा दो।
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|डैनियल 4:15| किन्तु भूमि पर उसके तने को छोड़ दो, और उसकी जड़ मत उखाड़ो। तने को लोहे और पीतल की जंजीर से बांधो, और उसको मैदान में हरी घास के बीच छोड़ दो, ताकि वह आकाश की ओस से सींचा जाए और वनपशु की तरह भूमि की घास खाए।
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|डैनियल 4:16| उसका हृदय बदल जाए! उसको मनुष्य के हृदय के बदले पशु का हृदय मिले। वह सात वर्ष [2] तक इसी दशा में रहे।’
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|डैनियल 4:17| ‘यह दण्ड प्रहरियों के आदेश के अनुसार दिया गया। यह निर्णय पवित्र दूतों के वचन के अनुरूप है। यह इसलिए दिया गया कि जीव-लोक के प्राणी जान लें कि सर्वोच्च परमेश्वर मनुष्यों के राज्य पर शासन करता है, और वह जिस को चाहता है, उसको यह राज्य देता है, और उस पर शासन करने के लिए छोटे-से-छोटे मनुष्य को भी नियुक्त करता है।’
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|डैनियल 4:18| “राजा नबूकदनेस्सर ने, मैंने यह स्वप्न देखा। अब, तुम, ओ बेलतशस्सर, इसका अर्थ बताओ; क्योंकि मेरे राज्य का कोई भी दरबारी विद्वान इसका अर्थ मुझे नहीं बता सका। पर तुम मेरे स्वप्न का अर्थ बता सकते हो; क्योंकि पवित्र परमेश्वर का आत्मा तुममें निवास करता है।”
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|डैनियल 4:19| “यह सुनकर दानिएल, जो बेलतशस्सर कहलाते हैं, बहुत समय तक स्तब्ध खड़े रहे। उनके हृदय में अनेक विचार उठे, जिन्होंने उनको व्याकुल कर दिया। मैंने कहा, “ओ बेलतशस्सर, मेरे स्वप्न, अथवा उसके अर्थ से तुम व्याकुल मत हो।” बेलतशस्सर ने उत्तर दिया, “महाराज, मेरे स्वामी! काश, यह स्वप्न आपके बैरियों के लिए हो, इसका अर्थ आपके शत्रुओं पर पड़े!
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|डैनियल 4:20| “महाराज, जो वृक्ष आपने देखा, और जो बढ़कर मजबूत हो गया, और जो इतना बढ़ा कि उसका शिखर आकाश को छूने लगा, और इतना ऊंचा हो गया कि आकाश के छोर से दिखाई देने लगा;
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