• अध्यायों द्वारा पढ़ें
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  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:11| आप जानते हैं कि हम पिता की तरह आप में से प्रत्‍येक को g 

  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:12| उपदेश और सान्‍त्‍वना देते और अनुरोध करते थे कि आप उस परमेश्‍वर के योग्‍य जीवन बितायें, जो आप को अपने राज्‍य की महिमा के लिए बुलाता है। h 

  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:13| हम इसलिए निरन्‍तर परमेश्‍वर को धन्‍यवाद देते हैं कि जब आपने हम से परमेश्‍वर का सन्‍देश सुना और ग्रहण किया, तो आपने उसे मनुष्‍यों का वचन नहीं, बल्‍कि- जैसा कि वह वास्‍तव में है- परमेश्‍वर का वचन समझ कर स्‍वीकार किया और यह वचन अब आप विश्‍वासियों में क्रियाशील है। i 

  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:14| भाइयो और बहिनो! आप लोगों ने यहूदा प्रदेश में स्‍थित परमेश्‍वर की कलीसियाओं का अनुकरण किया है, जो येशु मसीह में हैं, क्‍योंकि आप को अपने सजातीय लोगों से वही दुव्‍र्यवहार सहना पड़ा, जो उन्‍होंने यहूदा-वासियों से सहा है।

  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:15| उन यहूदियों ने प्रभु येशु तथा नबियों का वध किया और हम पर घोर अत्‍याचार किया। वे परमेश्‍वर को अप्रसन्न करते हैं और सब मनुष्‍यों के विरोधी हैं, j 

  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:16| क्‍योंकि वे गैर-यहूदियों को मुिक्‍त का सन्‍देश सुनाने से हमें रोकना चाहते हैं और इस प्रकार वे अपने पापों का घड़ा निरन्‍तर भरते जाते हैं और अब परमेश्‍वर का क्रोध उनके सिर पर आ पड़ा है। k 
  • पौलुस थिस्‍सलुनीके जाने को उत्‍सुक

  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:17| भाइयो और बहिनो! जब हम कुछ समय के लिए आप लोगों के प्रेम से नहीं, बल्‍कि आपके दर्शनों से वंचित थे, तो हमारी आप से फिर मिलने की अभिलाषा और बढ़ती गई। l 

  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:18| इसलिए हमने, विशेषकर मैं पौलुस ने, बार-बार आप के यहाँ आना चाहा, किन्‍तु शैतान ने हमारा रास्‍ता रोक दिया।

  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:19| जब हम अपने प्रभु येशु के आगमन पर उनके सामने खड़े होंगे, तो आप लोगों को छोड़ कर हमारी आशा या आनन्‍द या गौरवपूर्ण मुकुट और क्‍या हो सकता है? m 

  • |1 थिस्सलुनीकियों 2:20| हमारा गौरव और आनन्‍द तो आप लोग ही हैं।


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