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  • सियोन का दण्‍ड पूर्ण हुआ

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:1| सोने का रंग कैसे फीका पड़ गया! शुद्ध सोना कैसे खोटा हो गया! यरूशलेम में पवित्र पत्‍थर रूपी पुरुष गली- कूचों के छोरों पर मृत पड़े हैं।

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:2| सियोन के श्रेष्‍ठ पुत्र, जो शुद्ध सोने के तुल्‍य थे; वे कुम्‍हार के बनाए गए मिट्टी के बर्तन के समान तुच्‍छ माने गए!

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:3| सियार भी थन पसार कर अपने बच्‍चों को दूध पिलाती है; किन्‍तु मेरे लोगों की बेटी, वन की शुतुरमुर्गी की तरह निष्‍ठुर हो गई है। a 

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:4| प्‍यास के कारण दूध पीनेवाले बच्‍चों की जीभ उनके तालू से चिपक गई। बच्‍चे रोटी मांग रहे हैं, परन्‍तु कोई भी उनको रोटी नहीं देता।

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:5| जो पहिले छप्‍पन भोग खाते थे, अब वे सड़कों पर भूख से मरे पड़े हैं। जो कीमती वस्‍त्र पहिनकर जवान हुए थे, अब वे घूरों को गले लगा रहे हैं।

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:6| मेरे लोगों की नगरी यरूशलेम के अधर्म का दण्‍ड सदोम नगर के पाप के दण्‍ड से अधिक कठोर है, जो नगर बिना किसी के हाथ लगाए ही क्षण भर में उलट-पुलट गया था। b 

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:7| मेरे लोगों की नगरी के तरुण [1] हिम से अधिक निर्मल थे, दूध से अधिक उज्‍ज्‍वल थे उनकी देह मूंगे से अधिक लाल थी; उनका रूप नीलम जैसा सुन्‍दर था।

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:8| अब उनके चेहरे अंधकार से अधिक काले पड़ गए हैं; वे सड़कों पर पहचाने भी नहीं जाते। उनकी चमड़ी हड्डियों से चिपक गई है, वह लकड़ी के समान सूख गई है।

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:9| जो तलवार से मारे गए वे उन लोगों से अच्‍छे रहे, जो भूख का शिकार बने; वे खेतों के अन्न के अभाव में सूख गए, मुरझा गए।

  • |यिर्मयाह के विलाप 4:10| दयालु मांओं ने अपने ही हाथों से अपने बच्‍चों को पकाया! मेरे अपने लोगों की नगरी के विनाश के समय ये बच्‍चे अपनी मांओं का आहार बन गए। c 


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