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[वर]
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|सुलैमान के गाने 5:1|‘ओ मेरी संगिनी, ओ मेरी दुलहन! मैं अपने उद्यान में आया हूं। मैंने अपना गन्धरस और बलसान चुन लिया। मैंने मधु छत्ते से टपकता मधु खाया। मैंने दूध के साथ अंगूर-रस पिया।’ ओ प्रेमियो, छककर पियो।’ a
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[सखियाँ] ‘ओ मित्रो, खाओ-पियो।
वियोग की पीड़ा
[वधू] -
|सुलैमान के गाने 5:2|‘मैं सोई हुई थी, पर मेरा मन जाग रहा था। सुनो, मेरा प्रियतम द्वार खटखटा रहा है : “ओ मेरी संगिनी, मेरी प्रियतमा, मेरी कपोती, मेरी निष्कलंक सुन्दरी! मेरे लिए द्वार खोल! मेरा सिर ओस से भीग गया है। मेरी लटें रात में टपकती बूंदों से तर हैं।” b
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|सुलैमान के गाने 5:3|मैं अपनी साड़ी उतार चुकी हूं, अब उसे मैं फिर कैसे पहनूं? मैं अपने पैर धो चुकी हूं, मैं उन्हें कैसे भूमि पर रखकर मैला करूं?
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|सुलैमान के गाने 5:4|मेरे प्रियतम ने अपना हाथ दराज में डाला, मेरा हृदय भीतर ही भीतर धड़कने लगा।
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|सुलैमान के गाने 5:5|मैं अपने प्रियतम के लिए द्वार खोलने के लिए उठी। मेरे हाथों से गन्धरस टपक रहा था, किल्ली के मूंठों पर मेरी अंगुलियों से तरल गन्धरस टपक रहा था।
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|सुलैमान के गाने 5:6|मैं अपने प्रियतन के लिए द्वार खोल ही रही थी कि मेरा प्रियतम मुड़कर चला गया। जब उसने मुझे पुकारा तब मैं सुध-बुध खो बैठी थी। मैंने उसको पुकारा, परन्तु उसने उत्तर नहीं दिया। c
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|सुलैमान के गाने 5:7|मैं पहरेदारों के हाथ में पड़ गई। वे नगर में घूम-घूमकर पहरा दे रहे थे। उन्होंने मुझे घायल कर दिया। शहरपनाह के पहरेदारों ने मेरी चुनरी छीनकर मुझे नग्न कर दिया।
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|सुलैमान के गाने 5:8|‘ओ यरूशलेम की कन्याओ! मैं तुम्हें शपथ देती हूं! अगर तुम्हें मेरा प्रियतम मिले तो तुम उसे यह अवश्य बताना कि मैं प्रेम-ज्वर से पीड़ित हूं।’
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वधू द्वारा वर की प्रशंसा
[सखियाँ] -
|सुलैमान के गाने 5:9|‘ओ परम सुन्दरी, तेरा प्रियतम अन्य प्रेमियों से किस बात में श्रेष्ठ है, उसमें क्या विशेषता है कि तू हमें शपथ देती है?’
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[वधू]
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|सुलैमान के गाने 5:10|‘मेरे प्रियतम में तेज है, उसमें लालिमा है। वह हजारों में एक है।
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